
Bhagat Singh : A Short Biography By Thebestgyan
प्रिय पाठक, आज की इस पोस्ट में शहीद भगत सिंह के जीवन से सम्बंधित परीक्षाउपयोगी तथ्यों को सम्मलित किया है जो आपके प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अतिउपयोगी होगी।
| नाम- भगत सिंह |
| पिता का नाम- श्री किशन सिंह |
| माता का नाम- श्रीमति विद्यावती |
| जन्म- 28 सितम्बर 1907 |
| मृत्यु- 23 मार्च 1931 |
शहीद भगत सिंह का जन्म लायलपुर जिले के बंगा मे हुआ था जो कि अब पाकिस्तान में है।
भगत सिंह द्वारा दिए गए प्रसिद्ध नारे और विचार-
1. इंकलाब जिन्दाबाद
2. व्यक्तियों को कुचलकर वे विचारों को नही मार सकते।
3. प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते है।
4. मैं एक मानव हूं और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।
5. बम और पिस्तौल क्रांति नही लाते, क्रांति की तलवार विचारों की धार बड़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।
6. जरूरी नही था की क्रांति मे अभिशप्त संघर्ष शामिल हो यह बम और पिस्तौल का पंथ नही था।
7. निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण है।
भगत सिंह से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य-
1. भगत सिंह ने लाहौर में स्कूली शिक्षा के दौरान ही यूरोप के विभिन्न देशों में हुई क्रांतियों का अध्ययन कर लिया था।
2. जलियावाला बाग हत्याकांड के समय भगत सिंह करीब 12 वर्ष के थे, इसकी सूचना सुनते की वह अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जलियावाला बाग पहुंचे थे।
3. देश को आजाद कराने के लिए भगत सिंह ने जुलूसों में भाग लेना शुरू किया और कई क्रांतिकारी दलों के सदस्य भी बन गए थे।
4. भगत सिंह ने वर्ष 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी।
5. लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद भगत सिंह ने योजना बनाकर तत्काल ए0 एस0 पी0 जाॅन सांडर्स की गोली मारकर हत्या की और लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लिया।
6. अंग्रेजों को चेताने के लिए भगत सिंह ने दिल्ली के केन्द्रीय एसेम्बली पर बम हमला किया था।
7. बम हमले के बाद भगत सिंह ने इंकलाब जिन्दाबाद, साम्राज्यवाद-मुर्दावाद का नारा लगाया था और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था।
8. भगत सिंह करीब 2 वर्ष तक जेल रहे जहां उन्होंने 64 दिन तक भूख हड़ताल की ।
9. भगत सिंह को फांसी की सजा 7 अक्टूबर 1930 को सुनाई गयी थी।
10. भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गयी उस समय उनकी उम्र महज 23 वर्ष की थी।
11. भगत सिंह की फांसी का दिन 24 मार्च 1931 तय था लेकिन एक दिन पहले की उन्हे फांसी दे दी गयी और उनके साथ सुखदेव और राजगूरु को भी फांसी दी गयी थी।
12. भगत सिंह क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा को अपना गुरु मानते थे।
By- Mansi Sharma
इस पोस्ट में दिए सभी तथ्यों को उचित स्रोतों से लिया गया है फिर भी आपको कोई भी त्रुटि दिखी हो तो हमें तुरंत सूचित करें।
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